पेन पाल ( Pen Pal )
कैसी विडम्बना है न ! अक्सर छोटी-छोटी बातें कब बड़े अनुभवों में बदल जाती हैं पता ही नहीं चलता । मेरे जीवन में भी इस गुत्थी को खुलने में बीस वर्ष लग गए । इसकी शुरुआत तब हुई थी जब मैं इक्कीस साल का कॉलेज स्टूडेंट था । उस दिन मैं बॉम्बे मैंगजीन का वो पन्ना देख बैठा जिसमें दुनियाभर के उन लोगों के पते छपे थे, जिन्हें, भारत में पेन-पाल की तलाश थी । हालाँकि मैं अपने साथ के लड़के-लड़कियों को एयर-मेल से अनजान लोगों द्वारा भेजे गए मोटे लिफ़ाफ़े पाते देखता था । दरअसल, ये उस दौर का चलन (ट्रेन्ड) बन गया था तो मैं भी क्यों न शामिल होता! सो, मैंने उस पेज से लॉस एंजिल्स की एलिस हेनरी का पता चुन लिया । उसे लिखने के लिए मैंने कीमती लेटर-पैड खरीदा । मुझे याद है मेरे क्लास की एक लड़की ने मुझे लड़कियों का दिल जीतने के लिए एक क्लू दिया था और जिसे खुद उसने भी स्वीकार किया था कि गुलाबी रंग के कागज में लिखी चिट्ठियाँ लड़कियों को बेहद पसंद होती हैं । मुझे भी एलिस का दिल जीतना था सो, मैंने पिंक लेटर-पैड खरीदा, और सबसे पहले लिखा, "डियर पेन-पाल.."। पत्र लिखते हुए मैं ऐसे घबरा गया था जैसे कोई व...