Friday, 27 October 2017

शकुनश




जहाज में घूमने वाले जहाजियों और भेड़ों के रेवड़ के साथ नित नए और दिल को छू लेने वाले जगहों में घूमते गड़रिये के अलावा एक और पेशा होता है जो घुमक्कड़ी जीवन शैली जीते हैं वो होते हैं ' फेरीवाले ' ।
                 लड़के का नाम था 'अत्रेय' । अपनी बैलगाड़ी में रोजमर्रा के साजो सामान भर कर वह अक्सर एक गांव से दूसरे गांव घूम-घूम कर बेचता था । उसके साथी उसकी गाड़ी खींचने वाला ऊँट,और एक कोरे कागज की किताब जिसमे अक्सर वो उसे पसंद आने वाले लोंगों के चित्र और दिल को छू लेने वाली रेतों के टीलों की आकृतियां बादलों में छिपे सूरज की दो बादलों के बीच से  आती रश्मि जो धरती और आकाश के बीच सेतु बनाती थी उकेरता रहता था ।और सर पर चिलचिलाती धूप से बचने के लिए एक टोपी जो निशानी थी किसी के प्रेम की ।
                इसकी एक और विशेषता थी चेहरा पढ़ने की कला । किसी का भी चेहरा देख कर मनःस्थिति पढ़ सकता था ।


                                                              लगभग सुबह से बीस मील चल चुका था अब यहाँ से पच्चीस कोस तक सिर्फ रेगिस्तान ही रेगिस्तान था तब जा कर एक गांव पड़ता था 'सुदमापुर' । जहाँ वो है उसी ने तो दिया था ये गोल टोपी और कहा था कि निशानी है हमारे मिलन की ।
वो महसूस कर सकता था कि ऊँट थक गया है और भूखा भी होगा ये एकमात्र विश्राम करने के लिए बगीचा था इसलिए पेड़ के नीचे गाड़ी खड़ी किया ऊँट को छोड़ा और बैठ गया छाँव में । इतना सुकून कोई घर कैसे दे सकता है ...? कितनी खूबसूरत होती है ये घुमक्कड़ी ज़िन्दगी । मन ही मन सोच कर खुश हुआ क्योकि उसे रास आती थी ये खानाबदोश ज़िन्दगी ।
यहाँ बाग तो है लेकिन .... पीछे तो बीस मील तक कोई गांव नहीं है और आगे तो रेगिस्तान का समुद्र । फिर किसने लगाया होगा ये बाग । यही सोचते सोचते वो बाउली की और लपका  और बाउली के बगल से लगी सीढ़ी से नीचे उतर गया ।

              ऊंट गाड़ी के पहियों की आवाज सुनकर ऊपर आया देखा तो एक आदमी उसी की ओर सुराही लिए चला आ रहा है और एक महिला और एक लड़की पेड़ के नीचे बैठे हैं । उसने लड़की को देखा बहुत खूबसूरत थी उसने घाघरा और कुर्ती पहन रखा था घाघरा नक्कासी से पूरित था और चोली उसने सर पर ढक रखा था ।
वो लड़की को बैठकर गौर से देखने लगा उसकी आँखे जो बड़ी और गहरी काली थीं उसकी लटें बार-बार उसके गाल से होते हुए उसके होंठ तक आ जाती और हर बार वो उसे होंठों से फूंक कर पीछे धकेल देती । लड़की की जुल्फों की शरारतें देख कर उसे अच्छा लग रहा था । उसकी आँखों को वो देखना चाहता था क्योंकि उसे उसकी आँखों में एक अजीब सा सुकून देखा था ।  लड़के को पहली बार लगा की अगर ये मेरी होने को राजी हो तो मैं अपना घुमक्कड़ी जीवन छोड़ कर इसी बाग में बस जाऊं...। तभी उसने अनुभव किया कि वो उस लड़की का चेहरा नहीं पढ़ पा रहा जबकि उसकी माँ का बखूबी से पढ़ पा रहा था ' उसकी माँ अपनी शादी के बाद जब इसी जगह ठहरी थी और उसका पिता उसे उसी बाउली से पानी लेकर आया था ' इन्ही ख्यालों में गुम थी । यह जान कर की वो नहीं पढ़ पा रहा वो बेचैन होने लगा वह चाह रहा था कि कुछ पूँछे । लेकिन जब इस उथल-पुथल से बाहर निकला तो देखा की वो जा चुके थे । उसने अपनी पेंसिल और किताब निकाली और उसका चित्र खींचने लगा । स्मृति इतनी मधुर थी कि उसे बनाते-बनाते कब उसकी नींद लग गई पता ही नहीं चला ।

                                       शाम को सूरज ढलने वाला था यही समय है कि अब चलना चाहिए रेगिस्तान पहुँचते पहुँचते सूरज डूब जाएगा । लड़का सोचते हुए उठ गया ।
                            लगभग आधे रेगिस्तान में बड़ी मधुर सरंगी की धुन कोई बूढा लगभग पचास कदम आगे बजा रहा था
उसके सरंगी की ध्वनि इतनी मनमोहक थी की जहाँ तक आवाज़ सुनाई देती थी कोई भी हो बँध जाता था ।
अत्रेय के पहुँचते ही बूढ़े ने सरंगी बजाना बन्द किया और लड़के को रुकने को कहा ।

कहाँ तक चलोगे ...? -- लड़के ने पूँछा
'जहाँ तक में बात ख़तम हो ।
ये कैसा उत्तर हुआ ...! लड़के ने भौंहें सिकोड़ते हुए कहा फिर सोचा कोई पागल है ।
'पागल नहीं हूँ मैं इस रेगिस्तान का राजा हूँ । '
आप भी मन की बात पढ़ लेते हैं...? लड़के ने विस्मयकारी स्तब्धता से पूँछा ।
और खुद की भी काबिलियत बताने लगा की मैं भी पढ़ लेता हूँ.. फिर चुप हो गया ये सोच कर की ये तो सब पढ़ लेता है ।

लेकिन तुम उसका मन नहीं पढ़ पाए न ...? बूढ़े ने बिना भूमिका के पूँछा ।
' हाँ '। लेकिन ऐसा क्यों..?

क्योंकि वही तुम्हारी प्रेमिका है...।
मैं तो उसे जानता ही नहीं... और न ही उसका पता ।
रेगिस्तान मिलाएगा तुम्हें । सब कुछ पहले से ही लिखा है । बूढ़े ने कहा ।

इससे पहले तुम्हें रेगिस्तान की कीमिया समझनी होगी...
बूढ़े ने कहना शुरू किया..।
अगर तुम रेगिस्तान में हो और उससे प्यार करते हो तो हमेशा जगे रहना क्योंकि रेगिस्तान हमें आने वाले खतरे की सूचना देता है ,तुम्हें रेगिस्तान की भाषा समझनी होगी उसके इशारे समझने होंगे । अगर तुम खयालों में खोए रहोगे  तो रेगिस्तान तुम्हें निगल लेगा ।
दूसरी बात : अगर मृत्यु को अपनी ओर आती देख तुम धैर्य नहीं छोड़ते हो तो तुम परमात्मा के सबसे निकट होते हो और तुम मृत्यु को जीत लेते हो , रेगिस्तान यही सिखाता है ।
जब भी बवंडर आए और तुम रेगिस्तान में फँसे हो तो हवा का रुख तुम्हें पहचानना होगा । और याद रखना सन्नाटा बवंडर की भूमिका है । -- बूढ़ा उतर गया ।

                                                  लड़का उसी घर में था जहाँ से वो टोपी मिली थी , वो लड़की बैठी थी इसे देखते ही दौड़ कर आई । कहा - तुम वही फेरीवाले हो न , जो गंगा की कहानियां सुनाता था ?
मैं अपने विवाह के बाद गई थी सचमुच गंगा के किनारे बैठ जाओ तो लगता है माँ के पास बैठे हो बहुत अच्छा लगा था हमे
उस पल याद आई थी तुम्हारी ।
मैं सोचती थी की काश ! यहीं कहीं तुम होते तो और अच्छा लगता ।
फिर उसने बैठाया पानी पिलाया, फिर बताने लगी की उसके विवाह को तीन साल हो गए , उसके पति का बड़ा व्यवसाय है । लड़का थोड़ा मायूस हो गया , तब उसे बूढ़े की बात याद आ गई की जो लड़की मिली थी वो उसकी प्रेमिका थी ।
अपना सारा सामान बेच कर वो लौट पड़ा ।
                                                       वही रेगिस्तान .... लेकिन सन्नाटा पसरा हुआ था ।
'सन्नाटा बवंडर की भूमिका है ' बूढ़े की बात याद आ गई ।
लड़के ने जल्दी ऊँट को भगाया ताकि रेगिस्तान पार हो । लेकिन ऊँट भागे तो कितना !!!
सामने से धुंध ही धुंध आता देख लड़का घबरा गया उसने जल्दी ही ऊँट को खोल दिया  और भगा ।
" जब मुसीबत आए तो घबराओ मत सिर्फ ध्यान से देखना  उसे ... दृष्टा बनना रास्ता अनायास दिखेगा..
रेगिस्तान की कीमिया समझो सन्नाटे के दाईं ओर भागना ।  बूढ़े के ये शब्द बार बार लड़के के मन में गूंज रहे थे
बवंडर से आती चीख देख वह जगा ये वही लड़की थी जिसकी आँखों में वो खो गया गया था और बूढ़े ने उसे उसकी प्रेमिका कहा था ।
उसे बवंडर अपने चक्रवात के शिखर पर घुमा रहा था ।
दृष्टा बनना रास्ता निकलेगा ।- बूढ़े के ये शब्द फिर याद आ गए ।
वह दौड़ा बवंडर के केंद्र की ओर...केंद्र के दबाव ने उसे भी चक्रवात के शिखर पर लड़की के निकट पहुँचा दिया ।
कस कर पकड़ लिया लड़की को ऊर्ध्वाधर होकर दाईं और छलांग लगाया । दोनों रेगिस्तान में जा गिरे ।
बवंडर बांई ओर मुड़ गया ।

                                  पूरा चाँद निकल आया था, रेत पर चाँद की किरण अत्यधिक मनमोहक लग रही थी ऐसा लग रहा था जैसे समूचा रेगिस्तान चांदनी से नहा रहा हो... पूरे रेगिस्तान में चांदनी की बारिश हो रही हो ।
दोनों बैठे थे इस चांदनी में ।
तुम्हारे माता पिता कहाँ गए...? लड़के ने बात शुरू करते हुए कहा ।
'रेगिस्तान ने निगल लिया ।'
और तुम्हारे...?
'उन्हें भी' । कह कर लड़के ने मुस्कुराया ।
फिर मन ही मन बूढ़े को धन्यवाद देने लगा ।
लड़की चाँदनी में उसकी किताब देख रही थी जो कमर में बंधने के कारण तूफान से बच गई थी ।
और अपना चित्र देखते हुए पूँछा -- ' तो तुम्हें भी प्यार हो गया था...?
'हाँ..'  मतलब तुम्हें भी हुआ था लड़के ने खुश होते हुए पूँछा ।
' हाँ ' लड़की ने नज़रें झुकाते हुए कहा ।
फिर लड़के ने कहा - मैं अत्रेय ।
और मैं ... प्रथमा.. लड़की ने दो जोड़ी लटों को कान के पीछे ले जाते हुए कहा ।



















Wednesday, 4 October 2017

एक अनकहा रिश्ता



उस दिन कॉलेज में मेरा पहला दिन था । इसीलिए मैं थोड़ी जल्दी कॉलेज पहुँच गई थी और मेरी स्कूल फ्रेंड तृशा भी मेरे साथ थी, मैं मेडिवल हिस्ट्री डिपार्टमेंट में घूम रही थी जो मेरा सब्जेक्ट भी था, मैंने सोचा जब तक क्लासेस नहीं खुल जातीं घूम लिया जाए...।  मैं क्लास से कुछ दूरी पर थी क्लास खुल गई थी कुछ बच्चे भी आ गए थे,  तभी एक लड़का बाहर से हॉल में आया ,एक अजीब सी ऊर्जा थी उसमें ,उसका चेहरा खिला था .. ज़ीरो साइज दाढ़ी कर रखी थी उसने जो एक विशेष नक्श में थी, उसने कैप लगा रखा था ।
कुलमिलाकर वो बहुत स्मार्ट लग रहा था । मेरे पांव रुक गए मैं उसे देखती रही.. अनायास मैं भगवान से मनाने लगी ' हे भगवान ! वो मेरी ही क्लास में हो..' । वो उसी क्लास में गया -मेरी क्लास में । मैं इतनी खुश हो गई थी कि मुट्ठी बाँध कर नाच उठी थी ।
वो मुझसे दो टेबल पीछे बैठा था लेकिन मेरा मन तो उसमें ही था.. मैं बदल गई थी एकदम से..
तृशा परेशान हो गई थी और उसने कहा कि तुझे प्यार तो नहीं हो गया...?
हाँ.. सच में मुझे प्यार हो गया था...

मैंने ध्यान दिया वो भी मुझे देखता था.. और गाहें-बगाहें हमारी नज़र मिल जाती तो मुझसे पहले वो झुका लेता.. मैं समझ गई थी की वो बहुत शर्मीला है... लेकिन उसकी ये बात मुझे अच्छी लगी.. यही बात क्या मुझे तो समूचा वो ही अच्छा लगता था । और हाँ.. मैं समझ गई थी थी की वो एक बहुत अच्छा इंसान है ।
                                  एक दिन मुझसे पानी माँगा, मुझे यक़ीन है उसने खुद से बड़ी जिद्दोजेहद की होगी तब जाके हिम्मत जुटा पाया होगा ।  उसका विवेक नाम था, विवेक उच्चकुल का लड़का था और मैं...निम्न तबके और कुल की ।
मुझे पता था कि उसे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता.. लेकिन आखिरी में शायद हमे अलग होना ही होता या फिर हम अपने अपने परिवार को छोड़ के दूर चले जाते, मैं ये नहीं चाहती थी । इसीलिए वो जब भी बात करने की कोशिश करता मैं रूखेपन सा बर्ताव करती । लेकिन मैं एक लड़की हूँ..जिसे दिल में बसा लिया वो मेरे लिए भगवान बन जाता है इसीलिए तो हम स्त्रियां जब प्यार करती हैं तो आँख बंद कर लेती हैं ।

     23 जनवरी के दिन जब मैं गुलाबी रंग की पैरासूट वाली जैकेट पहन कर आई थी जिसे मेरी सभी सहेलियां कह रही थी की नहीं अच्छी लग रही, लेकिन जिस तरह से अपनी अंगुली और अंगूठे को जोड़ कर उसने कहा था ' जँच रही हो,👌'
उस पल मैं एकबार फिर उसकी दीवानी हो गई थी । कॉलेज के आखिरी दिन जब सब लोग फोटो खींच रहे थे याद के लिए वो भी खिंचवा रहा था लेकिन मैं एक खाली क्लास की खिड़की से देख रही थी कि उसकी निग़ाह मुझे ही ढूंढ़ रही है
मैं देख रही थी की जिस क्लास में मैं पेपर दे रही थी उस क्लास में उसका जाना, तृशा से मेरे बारे में पूँछना, और तृशा का ये कहना की मैं आज जल्दी चली गई... ये सुनकर विवेक का बेचैन होना..।
  मैं देख रही थी की ये सुनकर उसकी आँखे भीग आई थीं, मैंने महसूस किया कि मेरी आँखों से भी आंसूं ढरक आए हैं ।
मेरा जी चाह रहा था कि मैं उसे जा के रोक लूँ और लिपट कर कहूँ कि मत जाओ विवेक ।मैं सदा के लिए तुम्हें दिल में बसा लेना चाहती हूँ..मैं तुम्हारे साथ जीना चाहती हूँ लेकिन मैं अपने ख़्वाब पूरा नहीं कर सकती थी ..
मुझे आज रो लेना उतना नहीं अखर रहा था जितना उसके पास जाके दूर होने के बाद का दर्द ।
मैंने उसे चले जाने दिया..मुझे पता नहीं मैंने अच्छा किया या बुरा लेकिन आज भी मेरी आँखे उसे देखना चाहती हैं..
उसके अल्हड़पन में ,उसके मनमौजीपन में मैं भी उसके साथ होना चाहती हूँ..

                                      आज फिर मैं वही गुलाबी पैरासूट जैकेट पहन कर गई थी, इस उम्मीद पर की शायद आज वो फिर आए और कहे -" जँच रही हो । 👌"















इत्यलम् (मेरी डायरी)

13 सितंबर 2026 प्रसंग : एक Facebook पोस्ट से शुरू हुई स्मृति, AI और वास्तविकता पर छोटी-सी परिचर्चा आज Facebook पर मेरे एक Phil...