शकुनश
जहाज में घूमने वाले जहाजियों और भेड़ों के रेवड़ के साथ नित नए और दिल को छू लेने वाले जगहों में घूमते गड़रिये के अलावा एक और पेशा होता है जो घुमक्कड़ी जीवन शैली जीते हैं वो होते हैं ' फेरीवाले ' । लड़के का नाम था 'अत्रेय' । अपनी बैलगाड़ी में रोजमर्रा के साजो सामान भर कर वह अक्सर एक गांव से दूसरे गांव घूम-घूम कर बेचता था । उसके साथी उसकी गाड़ी खींचने वाला ऊँट,और एक कोरे कागज की किताब जिसमे अक्सर वो उसे पसंद आने वाले लोंगों के चित्र और दिल को छू लेने वाली रेतों के टीलों की आकृतियां बादलों में छिपे सूरज की दो बादलों के बीच से आती रश्मि जो धरती और आकाश के बीच सेतु बनाती थी उकेरता रहता था ।और सर पर चिलचिलाती धूप से बचने के लिए एक टोपी जो निशानी थी किसी के प्रेम की । इसकी एक और विशेषता थी चेहरा पढ़ने की कला । किसी का भी चेहरा देख कर मनःस्थिति पढ़ सकता था । ...