फ़िर वही मिलन के किस्से हैं फिर वही पुरानी बातें हैं..
फ़िर वही साज़ धड़कन वाला फ़िर वही पुराने नाते हैं..
मन में कुछ यादें बाक़ी हैं कुछ सपने अभी अधूरे हैं,
कुछ लोगों से मिलना बाक़ी है कुछ ख़्वाब अभी न पुरे हैं,
एक चेहरा है जो आँखों में यूँ अक्सर आता जाता है..
कुछ बात ग़ज़ब उस चेहरे में बस वो अपनी ही सुनता है..
वो जिसकी भी हो हो जाए मुझको इस पर ऐतराज नहीं,
कुछ यादें साझा करनी हैं कुछ किस्से उसे सुनाने हैं,
कुछ उससे कहना बाक़ी है कुछ उससे बातें करनी है,
उससे मेरा रिश्ता ही नहीं वो अक्सर कहती रहती है..
मैं उससे हँसता रहता हूँ वो मुझसे गुस्सा रहती है,
पर...उसकी मेरी हर बातों में एक रिश्ता अब भी बाक़ी है,
वो ख़ामोशी का रिश्ता है वो ख़ामोशी के नाते हैं...।
----- विनय तिवारी
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