उस शाम
तालाबों में एक है , बल्कि इसलिए क्योंकि यह तालाब ज़िन्दगी का एक बिम्ब उकेर देता है..
प्राकृतिक परिदृश्य अनुपम है ।
मेरे 12वीं का आखिरी पेपर गणित का था जो दुबारा 24 मार्च 2014 को हुआ.. वो दिन मेरे स्कूल लाइफ का अंतिम
और अविस्मरणीय दिन था..
हमने गोविंदगढ़ जाने रूपरेखा 24 को ही बनाया था लेकिन एक दिन बाद जाना तय हुआ ।
हम दो लोग थे एक तो मैं ही था दूसरा विराट था । मैं विराट के घर में ही रहता था..और अब हम दोनों अच्छे-खासे दोस्त
हैं...। हम उसी की मोटरसाइकल से जा रहे थे......
हम चल पड़े थे प्रकृति की गोद में.. मानो वह हमारा इंतज़ार कर रही हो और हमें गोद में भर लेने को उत्सुक हो..
हम थोड़ा रफ़्तार में जा रहे थे क्योंकि सूरज ढलने वाला था और हमें अंदेशा था कि कहीं सूरज डूब न जाए..
लगभग आधी दूरी पहले से मोटेरसाइकल मैं चला रहा था जब हम उस मोड़ में मुड़ने लगे जो गोविंदगढ़ की ओर जाता है
तो वहां कुछ पुलिस वाले दिखे मैं थोड़ा सहमा और आगे बढ़ गया.......
सचमुच वह तालाब बहुत दूर तक फैला था..उसे गोपालबाग कहते हैं..वाकई !! बहुत अच्छा लगा
हमने कई अद्भुत नज़ारे कैमरे में कैद किये .. वहां सूर्य की रश्मियां सब कुछ उज्जवल कर रही थीं..
वहाँ सूर्य का तालाब में बना प्रतिबिम्ब ,सूरज से तालाब में प्रतिबिम्ब की ओर आती किरणें एक सेतु बना रही थीं सूरज से
सूरज के प्रतिबिम्ब तक । ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे आकाश और धरती का इन्हीं रश्मि रुपी हाँथों से मिलन हो रहा हो..
और सूरज के पीछे बादलों का एक झुण्ड पगडंडी नुमा संरचना बना रही थी..मानो सूरज की अपनी बची हुई राह दिखा
रही हो जो तय करना है उसे..
सूरज के प्रतिबिम्ब तक । ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे आकाश और धरती का इन्हीं रश्मि रुपी हाँथों से मिलन हो रहा हो..
और सूरज के पीछे बादलों का एक झुण्ड पगडंडी नुमा संरचना बना रही थी..मानो सूरज की अपनी बची हुई राह दिखा
रही हो जो तय करना है उसे..
मैं इस क्षितिज में उभरे पगडंडी को अपलक निहारता रहा.. मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मुझे प्रकृति कुछ इशारे कर रही हो..
"अभी सफर बहुत करना है मंजिल पाने के लिए..किसी रोज बादल भी छा जाएँगे, लेकिन हमें हर रोज
नए उजाले के साथ नया विश्वास पैदा करना है..ताकि हम नई ऊर्जा ,नई संकल्पना के साथ चलते रहें सूरज
की तरह अपने पथ पर निरंतर......🚶🚶
✍ विनय एस तिवारी ©
"अभी सफर बहुत करना है मंजिल पाने के लिए..किसी रोज बादल भी छा जाएँगे, लेकिन हमें हर रोज
नए उजाले के साथ नया विश्वास पैदा करना है..ताकि हम नई ऊर्जा ,नई संकल्पना के साथ चलते रहें सूरज
की तरह अपने पथ पर निरंतर......🚶🚶
✍ विनय एस तिवारी ©

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