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विदा छिन्दवाड़ा!

विदा, छिंदवाड़ा!

छिंदवाड़ा मुझे अकस्मात मिला । कोई उम्मीद नहीं थी कि मैं कभी छिंदवाड़ा जाऊॅंगा, पर मिलना था सो मिले । यह जून 2023 था जब मैं यहाँ पहुँचा । पहले पहल उत्सुकता और अनभिज्ञता हर नए शहर में होती है सो हुई, किंतु जब रहने पहुँचा तो शहर ने आकंठ भर लिया ।

छिंदवाड़ा, मध्य प्रदेश का दक्षिणी जिला है जो नागपुर से ठीक उत्तर अवस्थित है । इसका शहरी क्षेत्रफल कम ही है किन्तु है शानदार शहर!
यहाॅं का मौसम, स्वच्छता, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठता यहाॅं की सौंदर्यमणियाॅं हैं । इसे प्रकृति ने अपनी छत्र-छाया में रखा है, ठीक जैसे पचमढ़ी को ।
यद्यपि यहाँ कोई नदी का तटीय क्षेत्र नहीं है, फिर भी स्वाभाविक खुलापन है इस शहर में, जिसके कारण मन आनंदित रहता है । वस्तुत यह खुलापन इस शहर में ही व्याप्त है, इसके मोहल्लों में, सड़कों में, सब्जी मंडी में हर जगह ।

इस शहर का मौसम यहाॅं का कीर्तिस्तंभ है, ग्रीष्म में भी तापमान  38 से 40° सेल्सियस पहुॅंचते ही उमड़ पड़ते हैं बादल और फिर लुढ़का देते हैं तापमान को नीचे ।
यहाॅं कॉफ़ी हाउस का डोसे, श्री राधे टावर के पास वीआईपी रोड की तंदूरी चाय, हरे माधव की फुल्की का स्वाद लाजवाब लगा मुझे । लेकिन हरे माधव का चाट मुझे पसन्द नहीं आया ।
 अनार, किसमिस ,काजू भी भला कोई चाट में डालने की चीज है?
वो लोग जिन्हे खट्टा और तीखा चाट (जैसा चाट बहुधा मिलता है) पसंद है उन्हे ये चाट बेसुआदी ही लगेगा । हाँ...वो लोग जो मीठा खाना खूब पसंद करते हैं उन्हें पसंद होना स्वाभाविक है ।

स्वतंत्रता दिवस के दिन पुलिस ग्राउंड में स्कूली बच्चों ने क्या खूब कार्यक्रम प्रस्तुत किया ! कई कार्यक्रमों में तो दर्शक भाव विभोर हो गए थे । अनुभववादी दार्शनिक कहते हैं कि बच्चों का मन एक कोरा कागज़ ( टेबुला रासा) होता है हम उन्हें जो भी दृष्टि देना चाहें दे सकते हैं, बात सही लगती है ।

हम सिमरिया के हनुमान मंदिर भी गए और नए बन रहे शिव लोक भी ।
किंतु, मैं नहीं जा सका जाम सांवली मंदिर, नहीं देख पाया तामिया की सुन्दर पहाड़ियों की छटा, उनका निभृत एकांत ।
नहीं देख पाया पातालकोट की घाटियों में पुरातन संस्कृतियों, सभ्यताओं का जीता जागता उदाहरण ।
शायद इस यात्रा रूपी जीवन में अकस्मात फिर मिलन हो और तब देख सकूं अनदेखे पहलुओं को । यही बात मुझे जीवन के प्रति निष्ठावान और कौतूहल से भरे रखती है ।
विदा छिंदवाड़ा, तुम भी क्या खूब मिले!
मेरे जीवन में अकस्मात आने के लिए शुक्रिया ।

                      सिमरिया हनुमान जी का मंदिर


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