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एक पत्र लिखना चाहता हूँ मैं ।



हाँ, मैं एक पत्र लिखना चाहता हूँ, ये दौर पत्र का तो नहीं ! इस रफ्तार भरी दुनियाँ में किसको इंतज़ार पसंद है ? लेकिन पत्र तो इंतज़ार चाहते हैं ना !
आपके हाथों से छूटने के बाद जाने कितने रास्तों से गुज़र कर , कितने हाथों को छूते हुए आखिर में पहुँचता है उस हाँथ तक, जो उसकी मंजिल है ।
तब जा कर मुकम्मल होता है उसका सफ़र, और कभी-कभार भटक जाता है रास्तों में, और  फेक दिया जाता है `डेड लेटरों' वाले कंपार्टमेंट में ।
डेड लेटर, ऐसे पत्र होते हैं जिन्हें लिखने वाले ने सही पता नहीं बताया होता या फिर, वो जिसे पढ़ना है बदल देता है अपना घर, बिना इस परवाह के कि शायद किसी दिन कोई पत्र आ गया तो !


तो,मैं भी पत्र लिखना चाहता हूँ लेकिन किसे ?
इसका कोई सटीक जवाब तो मेरे पास नहीं है लेकिन पहला पत्र, मैं स्वयं को लिखना चाहता हूँ ।
मैं खुद को देखना चाहता हूँ कि अपनी दृष्टि में किसी और के स्थान से कि कैसे दिखता हूँ मैं ? वस्तुतः मैं एक दृष्टा बनना चाहता हूँ ।
मैं खुद को एक बार अपने बारे में बताना चाहता हूँ, मैं खुद को बताना चाहता हूँ कि मैं देखना चाहता हूँ पहाड़ों का सौंदर्य, मुझे क्यारियों में सुसज्जित बाग नहीं पसंद है मुझे तो भाता है हिमालय का बेतरतीबीपन, उसका सन्नाटा सम्मोहित करता है मुझे ।
मैं जानना चाहता हूँ कि कैसे सूर्य की पहली किरण आ कर छूती है धरती को, और धरती खिल उठती है जैसे किसी पुरातन ग्रामीण भारतीय नारी के प्रिय का पत्र, आखिर आ गया हो प्रत्युत्तर लेकर परदेस से, जिसके शब्दों में गंध होती है उससे मिलने के चाह की, और शहर का जिक्र पढ़ कर कौंध उठती है उस नारी की आँखें, या फिर किसी कोने में कौतूहल होता है उसे भी उसके साथ शहर देखने का ।

या फिर, जैसे किसी ध्यानी में समाधि में उतरती हैं ब्रह्म की किरणें और इठला पड़ता है वह उस गज़ब के अनुभव से, ऐसा अनुभव जिसे डिस्क्रिप्टिव मेथड से नहीं समझाया जा सकता उसके लिए अनिवार्य है उसको प्रत्यक्ष करना ।

फिर एक पत्र लिखना चाहता हूँ मैं सभी लेखकों को,
उनकी पुस्तक लिखने के लिए । लेकिन उसमें मैं सिर्फ एक शब्द लिखना चाहता हूँ, " धन्यवाद " ।

एक पत्र मेरे ज़िन्दगी में आने वाली पहली लाईब्रेरी, रीवा की सेंट्रल लाइब्रेरी को । शायद वही थी जिसने मुझे रूबरू कराया किताबों से ।

मैं और भी पत्र लिखना चाहता हूँ एक लम्बी फेहरिस्त है । मैं बिना जवाब के इंतज़ार के लिखना चाहता हूँ बस इस बात के लिए कि मेरी ज़िंदगी मे आने के लिए " धन्यवाद " ।

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