शबनम, चाँदनी और तुम



अभी-अभी तो शबनम घास की बाहों में ठहरी है..
और अभी पूरा चाँद भी निकल आया है , और देखो.. इसकी चांदनी इन ओस की बूंदों में ऐसे चमक रही है जैसे तुम्हारे आने की खुशी में नैसर्ग ने हजारों दीपक जला रखे हों...
तुम्हारे वनवास से लौटने की खुशी में,
हाँ.. इन्हीं शबनमी दीपकों के दरम्यां बैठा हूँ मैं ! तेरी झूठी इन्तज़ारी में ..........
# और_तुम_आओ
Vinay S Tiwari

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