प्रेम का सौदागर

 किसी दार्शनिक ने कहा है कि, "दो भाई एक ही पिण्ड के तत्वों से बने होते हैं ,यही कारण है कि वो एकदूसरे की मनःस्थिति को  एक नज़र में ही समझ लेते हैं ।"
मैं मानता हूँ कि अगर टेलीपैथी का अस्तित्व है तो उसका इससे बेहतरीन Example कुछ और नहीं हो सकता ।
    ये जुलाई के फर्स्ट वीक की बात है मैं फर्स्ट स्टैंडर्ड पास करके सेकण्ड में जाने वाला था, मेरे भइया जो उस वक्त 9th
स्टैंडर्ड में थे उन्होंने मेरे लिए होस्टल देख रखा था ।
उनके हॉस्टल से मेरे होस्टल की दूरी लगभग डेढ़ घंटे की थी ।
उन्होंने बताया ।
मुझे अब गांव छोड़ कर शहर जाना था and it was 10 AM when we had to got bus for city.
                           मैं मम्मी को छोड़ कर जा रहा था उस समय मेरे मन में दो बातें एक साथ थीं पहली की मैं रोना चाह रहा था और दूसरी होस्टल की अंजानियत का भय ।
Because whenever I thought about hostel my mind white washed, because I didn't know anything about Hostel.
And also it was the moment when I realized why Brides are weep during go to In-laws house.
मैं हॉस्टल में ही था उस शाम बारिश काफी तेज हो रही थी
मैं रूम में अकेला था क्योंकि मेरा एक मात्र दोस्त मेरा रूममेट घर गया हुआ था ।
हॉस्टल का फ़ोन बजा फ़ोन मेरे लिए ही था मैं वहाँ पहुँचा रिसीवर फ़ोन के बगल में था, मैंने फ़ोन उठाया और हेलो कहा ।
'क्या चल रहा ड्यूड ??' मेरे भइया थे ।
मैंने कहा ठीक है लेकिन आज मुझे अच्छा नहीं लग रहा ।
एक सन्नाटा रह गया हमारे बीच ।
मैं समय काटने के लिए वीडियो गेम खेलने लगा लगभग दो घंटे बाद किसी ने दरवाजे पर दस्तक दी मैंने सोचा किचन वाले अंकल खाने के लिए बुलाने आए होंगे ।
                   मैं उठा दरवाजा खोला सामने मेरे भइया खड़े थे । उनका पूरा शरीर भीग चुका था , हाँ.. जो चीज नहीं भीगा था वो था भड़भूँजे के यहाँ का चना और मिर्ची की चटनी ।
मैं कुछ देर तक खड़ा रहा , मेरे कुछ समझ में नहीं आ रहा था बस मेरी आँखों से आंसू निकल रहे थे ।
उस दिन मुझे एहसास हुआ कि चित्रकूट में श्री राम से मिलकर भरत को कितनी आनंददायी अनुभूति हुई होगी ।

विनय एस तिवारी

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