Sunday, 5 July 2020

इलाहाबाद विश्वविद्यालय





हमारा विश्वविद्यालय, हमारा विश्वविद्यालय
हर एक उम्मीद का आँगन,
हर एक विश्वास का आलय,
हर एक सपनों को पर देता,
हर एक चाहत को बुन देता,
बसा माँ गङ्गा के तट पर-
है उगते रवियों का आलय ।
है देता हर परिन्दे को,
उड़ाने भी नई, नव लय ।
हमारा विश्वविद्यालय, हमारा विश्वविद्यालय ।

-विनय एस तिवारी

No comments:

Post a Comment

इत्यलम् (मेरी डायरी)

13 सितंबर 2026 प्रसंग : एक Facebook पोस्ट से शुरू हुई स्मृति, AI और वास्तविकता पर छोटी-सी परिचर्चा आज Facebook पर मेरे एक Phil...