Skip to main content

डायरी : 11 मार्च 2024

मैं अभी वरदान हॉस्पिटल रीवा में हूॅं यहाॅं एक परिवार में अभी-अभी बालक का जन्म हुआ है ।
सब खुश हैं, बच्चे का चाचा जो कि अभी लगभग 20 वर्ष का होगा, उसका नाम किसन है । वो अभी अपनी माॅं को फोन में बता रहा था की लल्ला हुआ!
बड़ी उमंग से बता रहा था!
वो बहुत प्रसन्न है ।
मैंने कहा - चाचा बन गए, बधाई हो! कहने लगा, सबको मिठाई खिलाऊॅंगा, आपको तो ढूॅंढ़ कर खिलाऊॅंगा! 
भारतीय जनमानस में यही खास बात है जो हमें अपरिचित होते हुए भी जोड़े रखती है । 


- विनय शंकर तिवारी
  11 मार्च, 2024
  वरदान हॉस्पिटल, रीवा

Comments

  1. क्या बात है तिवारी जी।

    ReplyDelete

Post a Comment

Popular posts from this blog

उस शाम

ब हुत दिन से मेरा मन कर रहा था कि गोविंदगढ़ में एक शाम गुजारूं.. इसलिए नहीं..कि वह मध्यप्रदेश के सबसे बड़े तालाबों में एक है , बल्कि इसलिए क्योंकि यह तालाब ज़िन्दगी का एक बिम्ब उकेर देता है.. प्राकृतिक परिदृश्य अनुपम है । मेरे 12वीं का आखिरी पेपर गणित का था जो दुबारा 24 मार्च 2014 को हुआ.. वो दिन मेरे स्कूल लाइफ का अंतिम और अविस्मरणीय दिन था.. हमने गोविंदगढ़ जाने रूपरेखा 24 को ही बनाया था लेकिन एक दिन बाद जाना तय हुआ । हम दो लोग थे एक तो मैं ही था दूसरा विराट था । मैं विराट के घर में ही रहता था..और अब हम दोनों अच्छे-खासे दोस्त हैं...। हम उसी की मोटरसाइकल से जा रहे थे......         हम चल पड़े थे प्रकृति की गोद में.. मानो वह हमारा इंतज़ार कर रही हो और हमें गोद में भर लेने को उत्सुक हो.. हम थोड़ा रफ़्तार में जा रहे थे क्योंकि सूरज ढलने वाला था और हमें अंदेशा था कि कहीं सूरज डूब न जाए.. लगभग आधी दूरी पहले से मोटेरसाइकल मैं चला रहा था जब हम उस मोड़ में मुड़ने लगे जो गोविंदगढ़ की ओर जाता है तो वहां कुछ पुलिस वाले दिखे मैं थोड़ा सहमा और आगे बढ़ गया........

विदा छिन्दवाड़ा!

विदा, छिंदवाड़ा! छिंदवाड़ा मुझे अकस्मात मिला । कोई उम्मीद नहीं थी कि मैं कभी छिंदवाड़ा जाऊॅंगा, पर मिलना था सो मिले । यह जून 2023 था जब मैं यहाँ पहुँचा । पहले पहल उत्सुकता और अनभिज्ञता हर नए शहर में होती है सो हुई, किंतु जब रहने पहुँचा तो शहर ने आकंठ भर लिया । छिंदवाड़ा, मध्य प्रदेश का दक्षिणी जिला है जो नागपुर से ठीक उत्तर अवस्थित है । इसका शहरी क्षेत्रफल कम ही है किन्तु है शानदार शहर! यहाॅं का मौसम, स्वच्छता, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठता यहाॅं की सौंदर्यमणियाॅं हैं । इसे प्रकृति ने अपनी छत्र-छाया में रखा है, ठीक जैसे पचमढ़ी को । यद्यपि यहाँ कोई नदी का तटीय क्षेत्र नहीं है, फिर भी स्वाभाविक खुलापन है इस शहर में, जिसके कारण मन आनंदित रहता है । वस्तुत यह खुलापन इस शहर में ही व्याप्त है, इसके मोहल्लों में, सड़कों में, सब्जी मंडी में हर जगह । इस शहर का मौसम यहाॅं का कीर्तिस्तंभ है, ग्रीष्म में भी तापमान  38 से 40° सेल्सियस पहुॅंचते ही उमड़ पड़ते हैं बादल और फिर लुढ़का देते हैं तापमान को नीचे । यहाॅं कॉफ़ी हाउस का डोसे, श्री राधे टावर के पास वीआईपी रोड की तंदूरी चाय, हरे माधव की फुल्की क...

पलास के फूल सी तुम

                        पलास का वृक्ष और उसकी छाँव शुभे! तुम्हारी आंखों को, मैं झील-ए-शराब नहीं कहता! इसका अर्थ यह नहीं, कि मुझे उनकी गहराइयों का भान नहीं! कि उनके सौंदर्य की पहचान नहीं! बल्कि इसलिए, क्योंकि ये उपमाएँ दूषित हो चली हैं, पुरातन हो चली हैं । मैं तुम्हारे चेहरे को चंद्र-सम नहीं कहता, इसलिए नहीं, कि तुम्हारे सौंदर्य पर मैं मोहित नहीं! या मैं आतुर नहीं होता, तुम्हें सर्वोत्कृष्ट रूपसी कहने को ! बल्कि इसलिए, क्योंकि इस उपमा का सर्वाधिक निरादर किया है मानव ने । इसलिए मैं तुम्हारी उपमा करता हूँ, ‛पलास के फूल से!’ जैसे गर्मी की तपन में भी, दिलाते हैं- मन को सुकून ये पलास के सुन्दर पुष्प-गुच्छ । इनकी लालिमा, तुम्हारे रक्तवर्णी चेहरे का प्रतीक है । इनकी शीतलता, तुम्हारी मधुरता का प्रतीक है । इसीलिए मुझे प्रिय हैं दोनों- तुम्हारा पलासी-मुख औ पलास-वृक्ष । - विनय एस तिवारी